- दीपक कुमार ने कहा कि करीब 80 फीसदी पुलिसकर्मियों को आईपी और आईपीडीआर की जानकारी नहीं है।
- तकनीकी प्रशिक्षण की कमी से पुलिस साइबर अपराधों की जांच में पिछड़ रही है।
- अपराधी और आतंकी लगातार तकनीक से अपडेट हो रहे हैं, जिससे साइबर अपराधों की संख्या बढ़ रही है।
- पेपरलेस पुलिस और न्याय व्यवस्था का समय आ रहा है, जहां डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग होगा।
- साइबर क्राइम पोर्टल पर बदले की भावना से की गई शिकायतों पर भी चिंता जताई गई।
- दीपक कुमार ने 2500 फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराए हैं और कई ब्लाइंड केस सुलझाने में मदद की है।
तकनीकी ज्ञान की महत्ता: पुलिस और न्याय व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए नए सॉफ्टवेयर का विकास आवश्यक है। युवाओं को इंटरनेट का सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि तकनीक के सृजनकर्ता बनने की प्रेरणा दी गई।
दीपक कुमार ने साइबर अपराध के मामलों में महिलाओं की सहभागिता की कमी पर भी चिंता जताई और सुझाव दिया कि अंतरराज्यीय समन्वय को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे लेन-देन के मामलों में बड़ी रकम फ्रीज करना उचित नहीं है। साइबर अपराधों की जटिलता को देखते हुए, पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
Continue With Google
Comments (0)