गया लाइव डेस्क। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने बिहार में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की संवैधानिकता को लेकर उठ रहे सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी बताया है।

  • मांझी ने एसआईआर को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कड़ा निर्णय बताया।
  • चुनाव आयोग के फैसले को अंतिम और मान्य कहा।
  • विपक्ष और चिराग पासवान के बयानों को अनुचित ठहराया।
  • चुनाव आयोग की प्रक्रिया में हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।
  • कांग्रेस पर निशाना साधते हुए विपक्ष के पास ठोस मुद्दों की कमी बताई।

महत्वपूर्ण निर्देश: चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले संबंधित तथ्यों की जांच करें। अनुचित आरोप लगाने से बचें और एसआईआर प्रक्रिया को समझें जो कानूनी रूप से संचालित होती है।

जीतनराम मांझी ने विपक्ष और खासकर चिराग पासवान की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो अपने दायित्वों का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता है और इसके अंतर्गत मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जाती है। मांझी ने कांग्रेस नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास अब ठोस मुद्दों की कमी है और वे गैर-जरूरी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

मांझी ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति अपने नाम के हटाए जाने पर अपना पक्ष रख सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से तकनीकी और संवैधानिक नियमों के अनुसार चलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसआईआर का उद्देश्य केवल अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है, न कि किसी योग्य मतदाता को वंचित करना।