गया लाइव डेस्क। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय कारा, गया से 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के आठ वृद्ध बंदियों को रिहा किया गया। सभी बंदियों ने कारागार में 14 वर्ष या उससे अधिक समय बिताया था। इनमें कुछ बंदी शारीरिक रूप से अस्वस्थ भी थे। एकबारगी उपाय के तहत हुई इस रिहाई के बाद जेल परिसर में उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी नजर आई।

लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटे वृद्ध बंदी

रिहा किए गए सभी आठ बंदी लंबे समय से जेल में बंद थे। 14 वर्ष या उससे अधिक का समय कारागार में बिताने के बाद उन्हें गांधी जयंती के अवसर पर बाहर आने का अवसर मिला। उम्रदराज होने के कारण इनमें कुछ बंदी शारीरिक रूप से अस्वस्थ भी बताए गए हैं। रिहाई के बाद वे अपने परिजनों के साथ घर लौटे।

परिजनों ने सरकार की पहल पर जताई खुशी

बंदियों की रिहाई के दौरान उनके परिजन काफी खुश नजर आए। लंबे अंतराल के बाद परिवार के सदस्य को जेल से बाहर आता देख परिजनों में भावुकता के साथ खुशी का माहौल रहा। उन्होंने राज्य सरकार की इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की। परिजनों का कहना था कि उनके लिए यह दिन लंबे समय तक याद रहने वाला है।

मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल

वृद्ध और लंबे समय से कारागार में रह रहे बंदियों की रिहाई को मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। उम्रदराज बंदियों को परिवार के बीच लौटने का अवसर मिलने से उनके जीवन में एक नई शुरुआत की संभावना बनी है। खासकर शारीरिक रूप से अस्वस्थ बंदियों के लिए परिवार के बीच रहना राहत का कारण बन सकता है।

नई शुरुआत का मिला अवसर

गांधी जयंती के मौके पर हुई यह रिहाई केवल जेल से बाहर आने तक सीमित नहीं रही, बल्कि रिहा हुए बंदियों के लिए परिवार और समाज के बीच लौटने का अवसर भी बनी। लंबे समय तक कारागार में रहने के बाद अब वे अपने परिजनों के साथ जीवन का नया अध्याय शुरू कर सकेंगे।

यह पहल वृद्ध बंदियों के मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई है। साथ ही, इससे समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का संदेश भी गया है। आने वाले समय में ऐसे और प्रयासों की उम्मीद की जा रही है, जिससे लंबे समय से कारागार में रह रहे पात्र वृद्ध बंदियों को राहत मिल सके।