गया लाइव डेस्क। गया जिले में कथित तौर पर नियमों और मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ममता नर्सिंग होम में प्रसव के बाद 23 वर्षीय रुबी कुमारी की मौत के मामले ने एक बार फिर निजी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी को कटघरे में ला दिया है। मृतका के पति मंटू कुमार ने गलत इंजेक्शन दिए जाने की आशंका जताते हुए पुलिस को आवेदन दिया है।

 

डिलीवरी के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

 

मंटू कुमार के अनुसार, रुबी कुमारी को 20 सितंबर को प्रसव के लिए ममता नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उनकी पत्नी की सामान्य डिलीवरी हुई और बच्चा सुरक्षित है। प्रसव के बाद भी महिला को अस्पताल में भर्ती रखा गया था।

 

पति का आरोप है कि 22 सितंबर को इंजेक्शन दिए जाने के बाद अचानक रुबी की तबीयत बिगड़ी और करीब पांच मिनट के भीतर उसकी मौत हो गई। उन्होंने आशंका जताई कि गलत इंजेक्शन के कारण यह घटना हुई। महिला की मौत के बाद दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात कहे जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया है।

 

एक मौत ने फिर खड़े किए कई सवाल

 

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि निजी नर्सिंग होम में मरीजों की सुरक्षा और इलाज के मानकों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या ऐसे संस्थानों में डॉक्टर, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आवश्यक दवाएं, आपातकालीन व्यवस्था और जीवनरक्षक संसाधन उपलब्ध हैं? अगर हैं तो उनकी नियमित जांच कौन करता है?

 

जिले के विभिन्न इलाकों में कथित अवैध नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया के बावजूद यदि ऐसे संस्थान दोबारा संचालित होने लगते हैं तो स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

पुलिस ने लिया आवेदन, जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

 

डेल्हा थाना के एसआई के अनुसार, महिला की 20 सितंबर को सामान्य डिलीवरी हुई थी और बच्चा सुरक्षित है। 22 सितंबर को महिला की मौत हुई। पति ने गलत इंजेक्शन दिए जाने की आशंका जताते हुए आवेदन दिया है। पुलिस ने आवेदन प्राप्त कर लिया है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

 

पुलिस के अनुसार, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी। इसके बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

अब स्वास्थ्य विभाग की बारी

 

मामले में लगाए गए गलत इंजेक्शन और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप फिलहाल मृतका के पति की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन घटना ने स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या जिले में संचालित निजी नर्सिंग होम की जांच केवल शिकायत आने के बाद ही होगी, या मरीजों की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी भी होगी?

 

सिविल सर्जन साहब, आखिर कब जागेंगे आप? निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच, उनके पंजीकरण और मानकों की स्थिति सार्वजनिक करने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग अब जोर पकड़ रही है।