गया लाइव डेस्क।  गया जिले में बाल श्रम के खिलाफ श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने मंगलवार को विशेष अभियान चलाकर पांच बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर 13 अक्टूबर 2026 को विभिन्न प्रखंडों में धावा दल ने कार्रवाई की। मुक्त कराए गए बच्चों को तत्काल सहायता के रूप में प्रत्येक को 3,000 रुपये दिए गए। वहीं, मुख्यमंत्री सहायता कोष से प्रत्येक बाल श्रमिक को 25,000 रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है।

मानपुर में दो, तीन अन्य प्रखंडों में एक-एक बच्चा मुक्त

विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मानपुर प्रखंड में दो बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। वहीं, शेरघाटी, बोधगया और गया सदर प्रखंड में एक-एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। इस अभियान का उद्देश्य प्रतिष्ठानों में बाल श्रम पर रोक लगाना और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिकों से काम कराए जाने के मामलों की जानकारी जुटाई गई।

चार प्रतिष्ठानों के नाम आए सामने

विभागीय जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान जिन प्रतिष्ठानों के नाम सामने आए, उनमें मनोज भोजनालय, चैतन्या ऑटो पार्ट्स सेल एवं सर्विस सेंटर, श्री गणेश मिष्ठान भंडार और सुमित फूड जोन शामिल हैं। हालांकि, पांच बाल श्रमिकों और पांच प्रतिष्ठानों का उल्लेख होने के बावजूद उपलब्ध विवरण में पांचवें प्रतिष्ठान का नाम स्पष्ट नहीं किया गया है।

नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी, जुर्माने का नोटिस

विभाग के अनुसार, बाल श्रमिकों से काम कराने के मामले में संबंधित नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही, उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रत्येक संबंधित नियोजक को 20,000 रुपये जुर्माना जिला स्तर पर संधारित कोष में जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।

बाल श्रम रोकने पर विभाग का जोर

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर उनकी सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करना है। बच्चों को तत्काल आर्थिक सहायता देने के साथ निर्धारित सहायता राशि उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।

बाल श्रम उन्मूलन के लिए ऐसे अभियान के साथ नियमित निगरानी और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। विभागीय कार्रवाई के तहत आगे भी बाल श्रम से जुड़े मामलों पर नजर रखी जाएगी।