गया लाइव डेस्क। जिला स्वास्थ्य समिति गया, एम्स पटना, और यूनिसेफ के सहयोग से जिला स्तरीय अनीमिया मुक्त भारत और सी-मैम कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य अनीमिया मुक्त भारत (AMB), मातृ अनीमिया प्रबंधन कार्यक्रम, और बाल संवर्धन कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।
- गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज की पूर्ण खुराक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
- पीएमएसएमए के अंतर्गत चिन्हित सभी एनीमिक गर्भवती महिलाओं का फॉलोअप कर पेरेंट्रल आयरन से उपचार सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
- बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के दस चरणों की जानकारी दी गई।
अधिकारियों को निर्देश
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे गर्भवती महिलाओं में अनीमिया के लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करें। त्वचा, चेहरे, जीभ और आंखों की लाली में कमी, अत्यधिक थकान, सांस फूलना, चक्कर आना, भूख न लगना, और सूजन अनीमिया के प्रमुख लक्षण हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ावा देने से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर से जांच
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की जांच डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से की जाएगी। गंभीर अनीमिया से ग्रसित महिलाओं का उपचार आयरन सुक्रोज के माध्यम से किया जाएगा।
मध्यम और गंभीर अनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा और उन्हें FCM (Ferric Carboxy Maltose) की पूर्ण खुराक उपलब्ध करवाई जाएगी।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के दस चरणों की विस्तृत जानकारी दी। इसमें वृद्धि निगरानी, दोनों पैरों में सूजन की जांच, भूख परीक्षण, चिकित्सीय मूल्यांकन, देखभाल स्तर का निर्धारण, पोषण और चिकित्सीय प्रबंधन, स्वच्छता और पोषण संबंधी परामर्श, नियमित निगरानी और मासिक फॉलोअप शामिल हैं।
इस बैठक का आयोजन जिले में अनीमिया और कुपोषण के खिलाफ चल रही योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए किया गया था, ताकि समुदाय में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाई जा सके और सभी लाभार्थियों को समय पर उचित उपचार मिल सके।
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