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<li>48 विदेशी श्रद्धालु विभिन्न देशों से गयाजी पहुंचे।</li>
<li>भारतीय परिधान में सजी विदेशी महिलाओं ने फल्गु तट पर पिंडदान किया।</li>
<li>विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्नों के दर्शन किए।</li>
<li>विदेशी श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था 5 अक्टूबर को गयाजी पहुंचेगा।</li>
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<p><strong>महत्वपूर्ण जानकारी:</strong> सभी श्रद्धालुओं के लिए यह अनुष्ठान पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए किया गया। यह धार्मिक परंपरा गयाधाम की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और धार्मिक महत्व को दर्शाती है।</p>
<p>गयाजी में पितृपक्ष के दौरान विदेशी श्रद्धालुओं का इस तरह आना धार्मिक पर्यटन के बढ़ते रुझान को दर्शाता है। यह गयाधाम की पौराणिक और धार्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। स्वामी लोकनाथ गौड़ के अनुसार, आने वाले समय में भी विदेशी तीर्थयात्रियों का यह सिलसिला जारी रहेगा। इस प्रकार, गयाजी का धार्मिक महत्व न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी
मान्य है।</p>
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