- संस्कृत शिक्षक लंबे समय से वेतनमान और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे हैं।
- महासंघ ने सरकार से शिक्षकों के सम्मानजनक वेतन और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का आग्रह किया।
- राष्ट्रीय स्तर पर संगठित होकर संघर्ष करने का निर्णय लिया गया।
- संस्कृत शिक्षा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया।
महत्वपूर्ण निर्देश: महासंघ ने सरकार से अपील की है कि संस्कृत शिक्षकों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए। शिक्षकों की उपेक्षा उचित नहीं है।
बैठक में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि संस्कृत शिक्षा भारतीय संस्कृति और परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसलिए, संस्कृत शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन और सेवा सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है। महासंघ ने केंद्र और राज्य सरकार से ठोस पहल करने की अपील की है ताकि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान हो सके। इस बैठक के अंत में संगठन को मजबूत बनाने और शिक्षकों को एकजुट करने का संकल्प लिया गया है।
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