- हेमंत द्विवेदी परिवार के साथ गयाजी पहुंचे और अपने दादा पंडित तोताराम द्विवेदी एवं प्रपितामह पंडित आत्माराम द्विवेदी के लिए श्राद्ध कर्म संपन्न कराया।
- उन्होंने पहली बार इस पवित्र स्थल पर आकर उसकी धार्मिक महत्ता का अनुभव किया और कहा कि गयाजी की महिमा का वर्णन शब्दों में करना कठिन है।
- स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी की प्रेरणा से, जो बद्रीनाथ क्षेत्र के लोगों को गयाजी की धार्मिक महत्ता समझा रहे हैं, द्विवेदी ने यहां आकर पिंडदान की परंपरा निभाई।
- उन्होंने गयाजी में पितृपक्ष मेले के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने का सुझाव दिया।
- द्विवेदी ने गयाजी में स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की और कहा कि यह केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु की भी जिम्मेदारी है।
हेमंत द्विवेदी ने स्नान घाटों पर स्वच्छता और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की अपील की।
गयाजी की यात्रा के दौरान हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वे अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और यहां की धार्मिक परंपरा की यादें लेकर लौट रहे हैं। उन्होंने गयाजी में व्यवस्थाओं की प्रशंसा की और भविष्य में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह आगमन देवभूमि उत्तराखंड और गयाजी के बीच धार्मिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने के दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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