गया लाइव डेस्क। कर्नाटक के भाजपा सांसद डॉ. के. सुधाकर ने सोमवार को गयाजी में पिंडदान किया। देर शाम बोधगया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर यदि विपक्ष को कोई आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया अपनाने के बजाय विपक्ष जंतर-मंतर पर बैठकर लोगों के बीच गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने पितृपक्ष मेला और गया की धार्मिक महत्ता पर भी अपनी बात रखी।
चुनाव आयोग पर सवाल है तो कोर्ट जाएं’
डॉ. सुधाकर ने कहा कि चुनाव आयोग से संबंधित किसी निर्णय या प्रक्रिया पर आपत्ति है तो उसके लिए संवैधानिक और न्यायिक रास्ता खुला है। विपक्ष हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। उनके अनुसार, इसके बजाय सड़क पर उतरकर और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हर मुद्दे में राजनीति करने और गलत नैरेटिव बनाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि यह डॉ. सुधाकर का राजनीतिक आरोप है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और SIR को लेकर अलग-अलग आपत्तियां सार्वजनिक रूप से उठाई जाती रही हैं।
जीत पर आयोग अच्छा, हार पर सवाल क्यों?’
भाजपा सांसद ने अलग-अलग राज्यों के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए विपक्ष के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल को चुनाव में सफलता मिलती है तो चुनाव आयोग और उसकी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन राजनीतिक परिणाम अनुकूल नहीं आने पर आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कुछ स्तर तक त्रुटि की संभावना हो सकती है, लेकिन इसके लिए निर्धारित सुधार और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था मौजूद है।
SIR में नाम छूटने पर प्रक्रिया का दिया हवाला
SIR को लेकर डॉ. सुधाकर ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए प्रावधान हैं। यदि किसी कारण से किसी व्यक्ति का नाम निर्धारित चरण में शामिल नहीं हो पाता है तो संबंधित प्रक्रिया के तहत बाद में भी नाम जोड़ने का रास्ता मौजूद है। उन्होंने लोगों से प्रक्रिया को समझने और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करने की बात कही।
पितृपक्ष मेला गया की बड़ी धार्मिक पहचान
बातचीत के दौरान डॉ. सुधाकर ने पितृपक्ष मेला को भी महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि गया की पहचान देशभर में पितृकार्य और पिंडदान की परंपरा से जुड़ी हुई है। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। ऐसे में मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छता, पेयजल, यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य और ठहरने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सुरक्षित और सुगम वातावरण मिलना चाहिए।
गया की धार्मिक और पर्यटन क्षमता को बढ़ाने पर जोर
डॉ. सुधाकर ने गया-बोधगया क्षेत्र की धार्मिक एवं पर्यटन क्षमता का भी उल्लेख किया। पितृपक्ष के दौरान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है। उन्होंने क्षेत्र की सुविधाओं को बेहतर बनाने और बाहर से आने वाले लोगों को सकारात्मक अनुभव देने की जरूरत बताई। बोधगया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ. सुधाकर ने एक ओर चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर पितृपक्ष मेला और गया की धार्मिक महत्ता को लेकर सुविधाओं पर जोर दिया। चुनाव आयोग और SIR को लेकर उनके बयान उनके राजनीतिक पक्ष के रूप में सामने आए, जबकि पितृपक्ष से जुड़े विचार धार्मिक आयोजन और श्रद्धालु सुविधाओं के संदर्भ में थे।
SIR पर विपक्ष को डॉ. सुधाकर की नसीहत- आपत्ति है तो कोर्ट जाएं, जंतर-मंतर पर राजनीति क्यों?
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