गया लाइव डेस्क। पितरों के मोक्ष की कामना लेकर गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार पितृपक्ष का धार्मिक क्रम बेहद विस्तृत होगा। श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने 25 सितंबर से 11 अक्टूबर तक होने वाले श्राद्ध, पिंडदान और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों की तिथि-वार सूची जारी की है। पितृकर्म की शुरुआत अनंत चतुर्दशी से होगी और अलग-अलग तिथियों पर गयाजी की प्रमुख पिंडवेदियों पर विशेष श्राद्ध कर्म संपन्न होंगे।
25 सितंबर से शुरू होगा पितृकर्म का सिलसिला
25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन पुनपुन पांवपूजा या गोदावरी श्राद्ध से पितृकर्म की शुरुआत होगी। इसके अगले दिन 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा पर फल्गु स्नान श्राद्ध और गयापाल तीर्थ पुरोहित की पांवपूजा होगी।
27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा पर ब्रह्मकुंड में जौ चूर्ण से पिंडदान के साथ प्रेतशिला, रामशिला और रामकुंड श्राद्ध होगा। इसी दिन काकबलि के तीन पिंडदान का भी विधान है।
पंचतीर्थ से बोधितरू तक होगा पिंडदान
28 सितंबर, सोमवार को द्वितीया पर पंचतीर्थ उत्तरमानस, उदीची, कनखल, दक्षिणमानस और जिव्हालोल श्राद्ध होगा। इसी दिन गजाधर जी का पंचामृत स्नान भी कराया जाएगा।
29 सितंबर, मंगलवार को तृतीया पर सरस्वती स्नान, पंचरत्न दान, मातंगवापी श्राद्ध और धर्मारण्यकूप के मध्य श्राद्ध होगा। श्रद्धालु बोधगया में बोधितरू दर्शन भी करेंगे।
30 सितंबर, बुधवार को चतुर्थी पर ब्रह्मसरोवर श्राद्ध, काकबलि श्राद्ध, तारक ब्रह्मा दर्शन और आम्रसिंचन का अनुष्ठान होगा।
विष्णुपद पर खीर-मावा से होगा पिंडदान
1 अक्टूबर, गुरुवार को पंचमी पर रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद श्राद्ध होगा। इस दिन खीर और मावा से पिंडदान तथा गयापाल तीर्थ पुरोहित की पांवपूजा होगी।
2 अक्टूबर, शुक्रवार को षष्ठी पर कार्तिकपद, दक्षिणाग्निपद, गार्हपत्याग्निपद और आखनयाग्निपद श्राद्ध होगा।
3 अक्टूबर, शनिवार को सप्तमी पर सूर्यपद, चंद्रपद, गणेशपद, संध्याग्निपद, आवसथ्याग्निपद और दधिचिपद श्राद्ध किया जाएगा।
रामगया-सीताकुंड में विशेष पिंडदान
4 अक्टूबर, रविवार को अष्टमी-नवमी के अवसर पर कण्वपद, मातंगपद, क्रौंचपद, अगस्त्यपद, इंद्रपद, कश्यप पद और गजकर्ण पद पर दूध तर्पण होगा। इसके साथ अन्नदान, रामगया श्राद्ध और सीताकुंड में बालू से पिंडदान किया जाएगा। सौभाग्यदान और पांवपूजा भी होगी।
पितृदोष-प्रेतदोष निवारण का विधान
5 अक्टूबर, सोमवार को दशमी पर गयासिर और गयाकूप में त्रिपिंडी श्राद्ध के साथ पितृदोष एवं प्रेतदोष निवारण श्राद्ध होगा।
6 अक्टूबर, मंगलवार को एकादशी पर मुंड पृष्ठ श्राद्ध, आदि गदाधर (आदि गया) धौतपद श्राद्ध और चांदी दान होगा।
7 अक्टूबर, बुधवार को द्वादशी पर भीमगया, गौप्रचार और गदालोल श्राद्ध किया जाएगा।
10 अक्टूबर को अक्षयवट पर पितृ विसर्जन
8 अक्टूबर, गुरुवार को त्रयोदशी पर विष्णु भगवान का पंचामृत स्नान-पूजन और फल्गु में दुग्ध तर्पण होगा।
9 अक्टूबर, शुक्रवार को चतुर्दशी पर वैतरणी गोदान एवं तर्पण किया जाएगा।
10 अक्टूबर, शनिवार को अमावस्या के दिन अक्षयवट श्राद्ध, खीर से पिंडदान, षोडशदान, सुफल और पितृ विसर्जन होगा। यह पितृकर्म का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाएगा।
11 अक्टूबर को होगी पितरों की विदाई
पितृपक्ष के अंतिम क्रम में 11 अक्टूबर, रविवार को गायत्री घाट पर दही-चावल से पिंडदान, आचार्य की दक्षिणा और पितृ विदाई होगी।
समिति के अनुसार, 25 सितंबर, 26 सितंबर, 27 सितंबर, 1 अक्टूबर, 4 अक्टूबर, 6 अक्टूबर और 10 अक्टूबर पितृपक्ष की प्रमुख तिथियां रहेंगी। इन अवसरों पर गयाजी की प्रमुख पिंडवेदियों पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ने की संभावना है।
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